Wednesday, August 16, 2017

कबूतर खानों से निकलकर
जो सड़कों पर आ जाते हैं
वो एक दिन नेता बन जाते हैं
और फिर देश को लंगड़ा बनाते हैं 


नेताओं की नीचता की चादर बेशर्मी है
जिसके बल पर ये मुंह उठाये घुमते हैं 

nek salaah

जो भी लोग अपना और अपने पुरखों का इतिहास जानना चाहते हैं तो उनसे मेरी प्रार्थना है की वो नेता बन जाएँ, जिस दिन उनको गरिमापूर्ण कुर्सी मिल जाएगी उस दिन उनकी पीढ़ियों के कारनामे स्वत्: उजागर हो जाएंगे फिर आपको हरिद्वर्ण क पंडों के पास नहीं जाना पडेगा | 

namkarn snskar




नामकरण संस्कार ,

झूठ का पुलिंदा ,आदरणीय प्रधानमंत्री मोदी जी ,
झूठे आंकड़ों के विशेषज्ञ , आदरणीय अरुण जेटली जी
चालबाजियों में ,चाणक्य के गुरु ,भाजपा अध्यक्ष ,अमित शाह
मोदी जी के पिछलग्गू , राजनाथ सिंह जी 

Monday, August 14, 2017

हमारी तो भगवन जी से १  ही प्रार्थना है कि वो मोदी जी का ख्याल रखें
 उनको कभी झोली वाला भिखारी  ना  बनायें ,हमारा तो देखा जायेगा | 

aajadi ka jshn




हम आजादी का जश्न आज कैसे मनाएं
हम तो आज भी मोदी जी की  गुलामी में घुटन भरी जिंदगी जी रहे हैं |



आज देश की आबादी में मात्र १% जनता आजादी की जश्न मनाएगी
बाकी ९९% तो मोदी जी की गुलामी का गुणगान कर रही है |



आज प्रात: मोदी जी लालकिले के प्राचीर से बड़ी लम्बी लम्बी छोड़ेंगे
परन्तु देश  जनता अपने कानों में ऊँगली देकर तमाशा देखेगी |



वैसे भी आज प्रात: के मोदी जी के भाषण में जनता की कोई दिलचस्पी नहीं है
क्योँकि उन्होंने कहना है जनता ने नोटेबंदी को ख़ुशी से स्वीकारा जिसके कारण देश २१ वीं सदी में पहुंचा
जनता ने जी एस टी को पूरी तरह स्वीकारा जिससे गरीब और मजलूमौ को नै रौशनी मिली
देश में महंगाई नाम की कोई चीज ही नहीं हैं ,मेरे राज में कोईंभी भूखा नहीं सोता जब की आज भी १९ करोड़
जनता  भूखी सोती है  और भविष्य में २० से २२ करोड़  है होने की संभावना है ,परन्तु हो सकता है तब मोदी जी इस कुर्सी पर न हों |
और बहुत सी बातें हैं जिनका जिक्र करने का कोई औचित्य  नहीं है


Friday, August 11, 2017

vyngy

पिछले कुछ दिनों से, 
जितनी भीड़ मयखानों में है 
उतनी भीड़ दावतखानों में नहीं 
शायद जरूरत है गम भुलाने की 
 उतनी चिंता रोटी खाने की नहीं | 






मोदी राज ने कुछ दिया तो नहीं 
पर बचा कुचा शकुन भी छीन लिया
नित नए स्वांग रचे जा रहे हैं 
 शांति का कहीं  नामों निशाँ नहीं | 




अब तो बेगैरत हो गए हैं  हम 
संस्कारों का तो नामो निशाँ नहीं
मुंह में जो भी आया बक देते हैं 
इंसानियत से कोई सरोकार नहीं |