सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार को मना कि न्यायायिक नियुक्तिओं में भर्ष्टाचार केंसर कि तरह बढ चुका है जस्टिस जी एस सिंघवी कि अध्यक्षता वाली वेकेशन बैंच ने इसके लिए सुप्रीम कोर्ट को दोषी ठहराते हुए कहा कि हमने २० साल पहले ही न्यायायिक नियुक्तियों में भ्रष्टाचार प़र नरम रुख अख्तियार रखा और इससे कड़ाई से नहीं निपटा बैंच से जुड़े जस्टिस सी ,के ,प्रासाद ने कहा कि अगर वक्त रहते कार्यवाही कि जाती तो आज जैसी स्थिति है ,उससे बचा जा सकता था
उत्तर प्रदेश कि जिला अदालतों में जुड़े कलर्कों और एनी ऑफिस स्टाफ कि नियुक्तिओं से जुड़े केस कि सुनवाई करते हुए जस्टिस सिंघवी ने कहा कि ऐसे में हम दुसरे (महक्क्मों )से जुड़े सलेक्सन प्रोसेस में खामिओं प़र किस आधार प़र टिप्पड़ी कर सकते हैं ,क्या हमें नैतिक अधिकार है ?यानी के सुनील गुप्ता ने कहा कि नियुक्तिओं में करप्सन के मामले आम हो चुके हैं .याची ने बाराबंकी कि कोशाम्बी जिले कि अदालतों में १९ कलर्कों और ४ स्तेनोग्राफेरों और १ ड्राइवर कि नियुक्ति के दौरान दिस्तिक जजों प़र संदेहास्पद भूमिका अपनाने का आरोप लगाया है ,
इलाहाबाद हाई कोर्ट ने इस मामले में आंसर शीत कि जांच कराई तो पाया कि सफल अभ्यार्थियों को तय मार्क्स से ज्यादा दिए गए ,इस परीक्षा में सामूहिक नक़ल का भी आरोप लगाया गया था ,हाई कोर्ट ने बाद में सभी नियुक्तियां रद्द कर दी थी जस्टिस सिंघवी ने कड़ी टिप्पड़ी करते हुए कहा कि जिला जजों को बर्खास्त कर दिया जाना चाहिए,
मेरी आदरणीय सिंघ्वी साहब से प्रार्थना है कि वो बताएं कि जब ये जिला जज प्रमोशन होकर ऊपर के एपेक्स कोर्ट हाई कोर्ट में जायेंगे तो क्या वहाँ प़र करप्शन नहीं होगा ,या जो जिला पहले से ही हाई कोर्टों में प्रमोशन होकर जा चुके हैं तो क्या वो भ्रष्टाचार नहीं फैला रहे होंगे ,अवश्य फैला रहे हैं और इसी लिए हाई कोर्ट से भिऊ गरीब और शरीफ आदमियों को न्याय नहीं मिल पा रहा और ना जाने कितने ही बेक़सूर मेरे जैसे और एनी आज भी टंगे हुए है तो क्रपा करके देखिये कि किस कोर्ट का जज क़ानून कि अनदेखी कर आम जनता को न्याय नहीं दे रहा तो उसको निकालने का भी प्रयत्न करें प़र देखने में आया है कि हाई कोर्ट के जज को तो हटाना भी सरकार या राष्ट्रपति तक के वश में नहीं है तो फिर चीफ जस्टिस भी भला क्या कर पायेंगे ,तो सबसे पहले तो आप करप्ट जजों को निकलवाने का अरेंजमेंट करें तभी तो भर्ष्टाचार खत्म होगा ऐसे जजों के कारण ही कितने निर्दोष व्यक्ति देश कि जेलों में गल रहे हैं प़र उनकी कोई सुनने वाला नहीं है
Sunday, May 23, 2010
Thursday, May 20, 2010
फोरेंसिक लैब[ ऍफ़ ,एस एल|में भ्रष्टाचार न्यायपालिका और लोकतंत्र के लिए ख़तरा
सभी राज्यों कि फोरेंसिक लैब ,उस राज्यं के मिनिस्ट्री ऑफ़ होम के अंतर्गत आती हैं और मिनिस्ट्री ऑफ़ होम के अधिकारी वहाँ प़र होने वाली सभी जांचों को जैसे कि सिग्नचर्स कि जांच ,खून कि जांच ,डी,एन ऐ ,कि जाच .फिंगर प्रिंट्स और सभी प्रकार कि क्रिमिनल जांचों को वहाँ के पुलिश अधिकारियों के साथ मिलकर और लैब के निदेशकों को अपने प्रभाव में लेकर मनमाने तरीके से मोल्ड करा लेते हैं और उसके बदले में मनमानी वसूली भी की जाती है इसका में फायदा देश के छुटभैये नेताओं से लेकर बड़े बड़े नेताओं तक को मिलता है या जो भी अधिक से अधिक खर्च कर सके चाहे वो क्रिमिनल ही क्यों ना हो ,इस तरह से शरीफ और गरीब या ऊंची पहुँच वाला बन्दा मारा जाता है क्योंकि न्यायालयों और न्यायाधीशों कि नजर में तो सभी रिपोर्ट सही होती हैं जबकि वास्तविकता ठीक उसके विपरीत है और और जज साहब उसके आधार प़र ही मुकद्दमे का फैसला और और मोंटी kई कई वर्षों कि सजा सूना देते है अब आप सोचिये जिस शरीफ आदमी को सजा होती है वो तो मारा गया और उसका विश्वास न्याय पालिका और लोकतंत्र से तो हट जायगा ,जिसके कारण जज साहब के हाथो एक बेक़सूर मारा गया जिससे जज साहब भी पाप के भागी बन गये और लोकतंत्र भी बदनाम हो गया और जब लोकतंत्र बदनाम होगा तो देश कि क़ानून व्यवस्था ही खराब हो जायेगी और सरकार के लिए भी परेशानी का सबब बनेगी ,यदपि अब न्याय पालिका तो लगभग सबहीं प्रकार के केसेस में अपने फैसले दोकुमेन्ट्स {कागजों }और साक्ष्यों के आधार प़र करते हैं केवल फोरेंसिक रिपोर्ट के आधार प़र नहीं जब कि पुलिश वालों ने तो उसको सब कुछ समझ रखा हैं और जब तक चारग सीट जमा नहीं होती तब तक वो उसे खूब कैश करते हैं और अच्छे आदमी को अभियुक्त बनाकर टाँगे रखते हैं और वास्तविकता भी है कि वहाँ कि पुलिश के कारण ही सब कुछ हो रहा है ,अत:हमारी सरकार और न्यायाधीशों और सी ,बी ,आई को चाहिए कि वो इस भर्ष्टाचार प्रकरण कि भली भाँती जांच कर देश कि शरीफ और गरीब जनता को संरंक्षण दें और प्रत्येक आदमी को न्याय मिले
Tuesday, May 4, 2010
आखिर भारत में लोकतंत्र है
आज हमारे देश में कानून के रखवालों ने कसाब प़र अभी तक मुकद्दमे चलाकर ,उसकी प्रत्येक बात को पूर्णत:गौर करके ,यानी के कुछ भी नजर अंदाज ना करते हुए और उसको अपने बचाव के लिए पूर्ण स्वतंत्र करके सम्पूर्ण दुनिया को भलीभांति दिखा दिया कि भारत में अभी भी लोकतंत्र पूरी तरह ज़िंदा है ,उसकी क्षत्र छाया में चाहे वो अपने देश का वासी हो अथवा विदेशी उनके साथ निष्पक्षता से न्याय किया जाता है क्योंकि लोकतंत्र का मतलब ही सबको सामान रूप से देखना है
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