Saturday, August 7, 2010

एंटीसिपेट्री बेल और रेगुलर बेल हेतु गाइड लाइंस

अक्सर शरीफ आदमी खासतोर प़र जिस आदमी को ,पुलिस या कुछ बेईमान लोगों के द्वारा किसी भी केस में फंसाकर ,उसे ब्लेक मेल या उसकी प्रापर्टी आदि को किसी ना किसी तरह हड़पने कि कोशिस कि जाती है ,वो आदमी क़ानून का सहारा लेने को ,और अपने आपको गिरफ्तारी से बचाने के लिए कोर्ट कि शरण लेता है ,ताकि उसे कुछ रिलीफ मिले ,जिसे एंटीसिपेट्री या एडवांस बेल कहा जाता है ,प़र कोर्ट के ला के मुताबिक़ जिस थाणे का केस होता है ,और जिस आई ओ का केस होता है उसको सूचित कर कोर्ट बुलाया जाता है ,और वो आई ओ उस शिकायत करता को भी साथ बुला लाता है और वो अपने साथ २ वकील भी ले आता है ,एक सरकारी वकील भी होता है इस प्रकार वो तीनो वकील कोई ढंग या क़ानून कि बात ना कहकर बेमतलब कि बाते करके जज को इम्प्रेस करने कि कोशिश करते है और जज साहब भी बेल हेतु गाइड लाइन बिना देखे इनकी बातो प़र यकीन करके बेल नहीं देते ,और एक शरीफ आदमी इन लोगों का शिकार हो जाता है ,और उनकी कोशिस होती है कि वो उस व्यक्ति कि बेल ही ना होने दें और जब उनका कार्य हो जाए तो फिर देखा जायगा ,और यही हाल रेगुलर बेल के समय भी होता है ,यद्यपि क़ानून के मुताबिक़ कुछ गाइड लाइन है जिनके बेश प़र दोनों प्रकार कि बेल मिल सकती है ,कुछ वकीलों और जजों से वार्तालाप के मुताबिक़ निम्नलिखित बाते बेल हेतु गाइड लाइन हैं जिनको देखकर बेल दी जा सकती है
गाइड लाइंस -----------------
क्या बेल मांगने वाले ने पहले भी कोई अपराध किया है 'समाज में उसका क्या स्थान है ,
कहीं उसे किसी झूठे केस में तो नहीं फंसाया जा रहा है ,केस कि अच्छी तरह से छानबीन करके देखें ,
क्या वो पुलिश इन्क्वारी में सहयोग दे रहा है ,जब भी थाणे बुलाया जाता है ,पहुंचता है या नहीं ,
क्या बेल लेने के बाद भाग तो नहीं जाएगा ,उसके पास पासपोर्ट ,वीसा है या नहीं ,
बेल लेने के बाद गवाहों को बहलायेगा ,फुस्लायेगा ,या धमकियां देकर अपने पक्ष में तो करने कि कोशिश तो नहीं करेगा ,
उसकी अपनी वर्थ क्या है ,
केवल उपरोक्त बातों को ध्यान में रखकर अगर बेल का निपटारा किया जाय तो जेलों में शरीफ आदमी जाने से बच जायेंगे ,भ्रष्टाचार में भी कमी आएगी और लोकतंत्र के हित में रहकर न्याय पालिका में भी जनता का विश्वास बढेगा ,मैं पहले भी लिख चुका हूँ कि जेल में एक व्यक्ति प़र प्रितिदीन २३७ रुपया का खर्च आता है ,और जेल कि व्यवस्था अलग से करनी पड़ती है ,और सच मानो तो जेलों को भरकर कुछ हासिल होने वाला भी 
नहीं है 









गाइड लाइंस

Friday, August 6, 2010

दिल्ली पुलिश नंब,१,भ्रष्टाचार में, लोकतंत्र का मजाक

कुछ कहावतें पुलिस के बारे में जनता में प्रचलित हैं ,
यदि किसी पुलिश वाले से कहो कि भैया मेरी ऊँगली कट गई है ,ज़रा इसं पे मूत (पेशाब करना )दे तो भाई बिना पैसे के वो मूतेगा नहीं ,
भैया पुलिश वालों से ना दोस्ती अच्छी ना दुश्मनी ,
ये तो बिना पैसे लिए अपने बाप को भी ना छोड़ते है ,
अरे किसी पुलिश वाले कि औलाद आज तक अच्छी देखीहै क्या ,
यदि रास्ते में सांप और पुलिस वाला मिल जाए तो भाई सांप को गले में डालकर पुलिश वाले को छोड़कर भाग लो ,
अरे पुलिश वालों से तो पंडित भी अच्छे हैं ,क्योंकि वो तो शादी ,ब्याह ,म्रत्यु भोज में ही खाते हैं ,प़र पुलिश वाले तो ,चोरी चकोरी लूट खसोट ,डकेती ,दान दहेज़ ,एक्सीडेंट ,अचानक मौत ,बच्चा हो या जवान ,लड़की हो या जवान ओरत ,दुखियारी हो या भिखारन ,कहीं भी खाने नहीं चूकते ,और तो और पोस्टमार्टम कि रिपोर्ट भी बिना खाए नहीं देते ,
और भी ना जाने कितनी ही कहावतें पुलिस के बारे में जनता में प्रचलित हैं ,जैसे कि पुलिश से घटिया कौम शायद कोई और होगी ,
कहने का तात्पर्य है कि इनसे तो भगवान् भी नहीं बचा सकता ,
अब कुछ हकीकतें देखिये ,आखिर क्यों हैं ये नंबर १
बिना पैसे के कोई भी ऍफ़ ,आई आर लिखी नहीं जा सकती ,जब तक आप पैसे नहीं दोगे पुलिस वाले आले बाले गाते रहेंगे ,
आपकी कार चोरी हो कर जब तक दिल्ली से बाहर नहीं चली जायेगी तब तक ये कोई रिपोर्ट नहीं लिखेंगे ,
पैसे देकर दिल्ली के किसी भी शरीफ आदमी को चोर डाकू बनव्वा लीजिए ,
यदि आपके मकान प़र कोई कब्जा कर ले तो ये उस आदमी से पैसे लेकर उसे मालिक बना देंगे ,और प्रापर्टी विवाद बना देंगे क्योंकि उसमे ये किसी को भी अरेस्ट नहीं कर सकते ,दिल्ली में प्रापर्टी विवादों के जितने भी झगडे कोर्ट्स आदि में चल रहे उनमे लगभग सभी में दिल्ली पुलिश कि दखलंदाजी है ,
भाइयों के प्रापर्टी विवाद को क्रिमिनल केस बनवा देंगे ,चाहे दस्तखत के लिए ऍफ़ एस एल कि रिपोर्ट भी बदलवा देंगे ,बस पैसे खर्च करो ,
केसेस में जितने मोटे पैसे खर्च करोगे उतनी ही बड़ी धारा लगा देंगे ,३०२ ,३०४ ,३०७ ,३०४ ऐ ,३०४ बी ,४२० ,१२०बी ,३६८ ,३७१ ,यानी कहने का तात्पर्य है पैसे देकर कुछ भी करवा लो ,
केस को हल्का भारी कराना सब आई ओ साहब के ऊपर है ,
डिस्क्लोजर रिपोर्ट ,चार्जशीट ,चाहे जितनी टेडी सीधी बनवा लो ,
दहेज़ के कसेस में कितनों को अन्दर बाहर करवाना है ,
बेल दिलवानी ना दिलवानी सब इनके हाथ में है यदि बेल दिलवानी है तो पैसे लेकर रिपोर्ट अच्छी बना देंगे और नहीं बेल करवानी तो रिपोर्ट को ऐसी बना देंगे कि जज तो क्या चीएफ़ जज भी बेल ना दे सके ,
गरीब आदमी तो इनके पासन्याय मांगने जाएगा तो मार और झिडकी ही खायेगा या फिर उसी पे उलटा मुकद्दमा दायर करवा कर अन्दर भेज दंगे
दिल्ली में कौन नहीं जानता कि थानों कि भी बोली लगाईं जाती है ,सभी थानों के रेट मुकर्र हैं ,इनका एस एच ,ओ वो ही बनता है जो सबसे ज्यादा पैसा देता है
कितने ही बार तो इमानदार पुलिश वाले अपने उच्च अधिकारियों की जरूरते पूरी करते करते इतने दुखी हो जाते हैं कि आत्महत्या तक कर लेते हैं क्योंकि ये लोग उसको चेन तो लेने नहीं देते ,
अभी अभी एक इन्स्पेक्टर ने खुद स्वीकारा है कि मेरे पास बचा क्या है सारी कि सारी रकम जो पिछले वर्षों में कमाई उसे तो ऊच्च अधिकारी खा गए ,दरअसल इस महकमे में अंदरूनी भ्रष्टाचार भी बहुत है ,
ई ,ओ, डब्लू में पोस्टिंग होना कोई आसान काम नहीं है क्योंकि वहाँ तो बर्शात होती है ,सभी बहती गंगा में खूब हाथ धोते हैं ,
वास्तविकता तो ये है कि नंबर १ का होना लोकतंत्र के मुंह प़र एक काला टीका है ,बदनुमा दाग है ।
यदि loktantr को जीवित रखना है तो रक्षक को भक्षक बानने से रोकना होगा





Wednesday, August 4, 2010

भ्रष्टाचार और कामनवेल्थ गेम्स

कामन वैल्थ गेम्स होने में अभी दो महीने का समय है ,और अभी तक उसकी तैयारियां पूरी नहीं हुई हैं ,अभी तक १७ लाख टिकिट्स में से केवल ४०,००० ही बिक पाई हैं ,८५ हजार करोड़ रुपया कहते हैं कि खर्च हो चुका है ,चारों और से भ्रष्टाचार कि बदबू आने लगी है विपक्ष ने तो पूरी तरह से भ्रष्टाचार के खिलाफ मुहीम ही छेड़ दी है ,वैसे तो अच्छी बात है प़र अभी तो उनको चाहिए कि किसी भी तरह से वर्तमान सरकार को सहयोग देकर जल्दी से जल्दी जो काम बाकी बचे हैं उनको पूरा करवा दें ताकि समय प़र गेम्स हो सकें ,यदि किसी भी तरह से हम ये गेम्स कराने से चूक गए तो इसमें वर्तमान सरकार कि ही नाक नहीं कटेगी बल्कि पूरे देश कि ही कट जायेगी ,इसलिए लड़ाई झगडा छोड़कर ,महंगाई कि मार को भी छोड़कर सरकार को काम करने देना चाहिए ,ताकि हमारी छवि खराब ना हो ,कभी फिर वर्तमान में कोई से खेल भी भारत में ना हो सकें और भारत को ब्लेक लिस्टेड कर दिया जाय ,भ्रष्टाचार कि लड़ाई तो हम बाद में भी लड़ते रहेंगे ,कौन सा दो महीने के बाद क्या सरकार के पास समय नहीं है ,विपक्ष जैसा सोच रहा है वैसा हो नहीं सकता ये सरकार आसानी से जाने वाली नहीं है ,सरकार को उखाड़ने के लिए दम कि जरूरत होती है और अभी वो दम कहाँ है विपक्ष में ,इसलिए भाइयो घर कि लड़ाई छोडो और गेम्स कि और ध्यान दो ,

Sunday, August 1, 2010

विभूति राय जी(महात्मा गांधी वि,वि ,के उप ,कु)कि लेखिकाओं के लिए अभद्र भाषा

महात्मा गांधी विश्व विद्यालय के उपकुलपति श्रीमान विभूति राय जी ,जो कि १९७५ बेच के आई ,ऐ ,एस भी है ,उन्होंने हिंदी कि लेखिकाओं को वैश्या तक कह डाला (हिंदी कि लेखिकाओं को उन्होंने कहा कि ये लेखिकाओं ने अपने आप को बड़ी वैश्या साबित करने कि होड़ लगा राखी है )"
ये सम्पूर्ण नारी जाती का अपमान है ,ऐसा उन्होंने क्या देखा कि ऐसी अभद्र भाषा का प्रयोग करना पडा ,लेखिका आखिर लेखिका होती है और वो हमेशा ऐसा ही लिखेगी जिससे कि समाज का भला हो ,दुसरे समाज को अच्छे गुण ,चारित्रिक गुण ,समाज सेवा ,सब कुछ नारी ही तो देती है ,
ये नारी जाती का केवल अपमान ही नहीं बल्कि भारत के लोकतंत्र का मजाक उड़ाना है जहां आज नारी पुरुषों से आगे चल रही है और सरकार भी उनके कार्यों कि सराहना कर रही है वहाँ प़र संकुचित दिमांग वाले पड़े लिखे लोग नारी जाती का अपमान कर रहे हैं ,
केवल लेखिकाओं को ही नहीं बल्कि सम्पूर्ण नारी जाती को इस पड़े लिखे आदमी के खिलाफ आन्दोलन चलाना चाहिए और ,उसे सबक सिखाना चाहिए ताकि भविष्य में ये व्यक्ति असभ्य भाषा का प्रयोग ना करे ,
हमारी सरकार ने यदि लोकतंत्र कि रक्षा करनी हे ती इस आदमी को यकदम जिस पद प़र भी है हटा देना चाहिए और यदि उसके प्रति कोई मुकद्दमा बनता है तो ऍफ़ ,आई ,आर दर्ज कराकर गिरफ्तार करना चाहिए