Wednesday, February 29, 2012

loktntr hamare desh main

राजस्थान कोर्ट मैं एक आदमी ने जहर खाया क्योंकि वो भारत के लोकतंत्र में न्याय के लिए ३२ साल से भटकता फिर रहा था पर न्याय नहीं मिला ,ये १ उदाहरन है ,न्याय ना मिलने के कारण देश में ना जाने कितने लोग आत्महत्या कर रहे है यदि आंकड़े एकत्रित करे जाए तो पता चलेगा पर लोकतंत्र मैं सबकुछ वाजिब है ,लोकतंत्र में कोई भी न्यायाधिकारी किसी भी व्यक्ति की परिस्तिथि नहीं देखता उसका काम तो केवल तारीख पे तारीख देना है कोई भी अपनी discrishan  पावर का इस्तेमाल नहीं करता और सही व्यक्ति या तो धक्के खाता रहता है या जेल की हवा खाता है और न्याय के अभाव में बदमाश और गुंडे ,जोड़तोड़ करने वाले अथवा पैसे देकर काम करवाने वाले मजे लेते रहते हैं क्योंकि यही तो लोकतंत्र है ।

Tuesday, February 21, 2012

bhrshtaachaar ko mitaanaa hai to

भ्रष्टाचार को मिटाना है तो हम सबको श्री अन्ना हजारे के आन्दोलन में सम्मिलित होना चाहिए यदि उनको सहयोग नहीं मिला तो हार थककर वो भी अस्पताल में भारती हो जायेंगे और नाजाने क्या क्या सोचते रहेंगे और ये भी हमको सोचना चाहिए की इस तरह के महात्म्मा महान आत्मा ,देशभक्त बिरला ही पैदा होते हैं ६२ साल के बाद तो एक अन्ना हजारे जी पैदा हुए है और उनको भी सहयोग ना मिला तो ये आन्दोलन ठप्प हो जाएगा और भ्रष्टाचारी एक बार फिर हवा में उड़ने लगेंगे क्योंकि उनको रोकने वाला कोई नहीं होगा और प्रतेक आदमी का जीना मुश्किल हो जाएगा और लोतंत्र भी खतरे में पद जाएगा ,तो प्रिय देशवासियों यदि लोकतंत्र को बचाना और खुद को जीवित रखना चाहते हो तो बस अन्ना जी को समर्थन दो 

Monday, February 20, 2012

india kaa loktntr

भारत में लोकतंत्र कभी था या नहीं था ये तो पूर्णतया में नहीं जानता पर एतिहासिक घटनाओं के विवरण को जानकार जो मेरी समझ में आया मैं केवल वोही लिख रहा हूँ ।
सन १००० इसवी के बाद से १५८० तक जब मुग़ल भारत में आये उससे पहले तक की घटनाओं से पता लगता है शासक सत्ता होने के बावजूद भी हमारे देश की जनता काफी खुश थी और जिस समय में जनता खुश हो तो वो समय ही वास्तव में सच्चा लोकतंत्र है इसका मतलब उस समय लोकतंत्र था और हमारा देश आजाद था ।
१५८० के बाद जब मुगलों का शासन स्थापित हो गया तो हमारा कुछ कुछ परतंत्र हो गया क्योंकि हमको मुग़ल सरकार के हुक्मरानों के अनुसार चलना होता था ।
उसके बाद १७वी शताब्दी के बाद भारत पर बर्तानियों का शासन होता चला गया तब हम उनके गुलाम हो गए और अब हमको वोही करना होता था जो अंग्रेजी सरकार चाहती थी ,पर आम आदमी की उस समय भी सुनवाई होती थी ,न्याय व्यवस्था काफी अच्छी थी जैसा की बुजुर्ग लोग कहते हैं की अंग्रेजी राज ही अच्छा था आजकल की सरकारों से ।
उसके बाद सन १९४७ में हमारा देश आज़ाद हो गया और लोकतंत्र स्थापित हो गया ,देश की जनता बहुत खुश थी क्योँ की जनता का अपना लोकतंत्र होगा सबको न्याय मिलेगा ,गरीब अमीर का भेदभाव दूर होगा  पर वास्तविकता उलटी ही होगी सारे मंसूबे रखे रह गये और आज फिर देश का हर व्यक्ति स्वयम को अपने ही देश में गुलाम समझ रहा है क्योंकि आज किसी भी आदमी की कहीं भी सुनवाई नहीं हो रही ,ना जाने कितनी जनता भूखे पेट सोती है ,कितने ही लोग न्याय व्यवस्था से दुखी हैं ,जब मुकद्दमा पड़ता है तो न्याय व्यवस्था के कारण उसके ८ मुकद्दमे बन जाते है कहीं कोई सुनवाई नहीं होती ,गरीब और शरीफ आदमियों को न्याय नहीं मिलता 'चारों और भ्रष्टाचार व्याप्त है ,पैसे दो काम कराओ जिस के पास पैसे नहीं है वो जेल जाओ भूखे मरो या कोर्ट कचहरी के चक्कर लगा कर मर जाओ या आत्महत्या करो ,देश में पुलिश और जुदिसियारी ने तो हद ही कर राखी है गरीब गरीब होता जा रहा है भ्रष्टाचारी आमिर बनता जा रहा ,किसान भूखा मर रहा है दलाल मजे ले रहे है ,प्रतिदिन जनता आत्महत्या कर रही है इन सभी बातों से पता चलता है की हम पहले नहीं पर आज लोकत के बावजूद देश की ९० %

Friday, February 17, 2012

kewal U P kaa kharchaa (chunaawon me )

केवल उत्तर प्रदेश में लोकतंत्र को स्थापित करने के लिए चुनाव पर दो लाख करोड़ का खर्चा आ रहा है तो इस हिसाब से हमारे की २८ राज्यों में चुनाव कराने लगभग ५० लाख करोड़ का खर्चा आयेगा यदि इसी तरह खर्च होते रहेंगे तो देश का क्या भला होगा ,मेरे हिसाब से तो एक विकसित देश के लिए कुछ अच्छा नहीं नहीं है यदि इतना पैसा गरीबों के उत्थान में लगाया जाए तो शायद देश को गरीबी जैसी महामारी से बचाया जा सकता है ,और इस खर्चे को भी हम ५ से डिवाइड नहीं कर सकते क्योंकि अब विधान सभाएं या लोक सभा अपना कार्यकाल पूरा ही कहाँ कर पाती हैं ।
अत: अब सरकार को चाहिए की देश हित में इसका और कोई तरिका तलाश करे ताकि सरकारें भी चलती रहे और गरीबी जैसा अभिशाप भी मिटे अथवा लोकतंत्र भी बरकरार रहे ।

Thursday, February 16, 2012

loktantr me U P chunaaw ki sthiti

हाथ कहता है
हाथी को मिटा देंगे
कमल कहता है
हाथ काट कर ,
हाथी पर बिठा देंगे
फिर भी दोनों बाज ना आये तो
अपनी खुशबू सुंघा
बेहोश करा देंगे
जब बेहोश हो जायेंगे तो
मोहर उठा कर
बैलेट पेपर पे लगा देंगे ,
तब साइकल ने कहा की
मौका लगते ही हम भी
अपना जौहर दिखा देंगे
हाथी जो अब तक चुप था बोला
हमारी संख्या इतनी हो चुकी है
तुम सभीको अपने पैरौं से कुचल
अपना झंडा फहरा देंगे
सब देखते रह जाओगे
और फिर दुबारा सब मिलकर
मेरे पीछे पद जाओगे
पर कुछ भी बिगाड़ नहीं पाओगे
उसके बाद जनता को
प्रलोभन दे दे कर
पांच साल बाद दौबारा
जनता के बीच नजर आओगे ।