Thursday, March 26, 2009

हिन्दुस्तान में लोकतंत्र को जीवित रखना है तो

आने वाले लोकसभा चुनावों में दरियादिली से हिस्सा लें और ख़ुद तो वोट डाले ही ,अपने परिवार ,यार ,दोस्तों ,पदोसियौं को भी अधिक से अधिक संख्या में वोट डालने हेतु प्रेरित करना ना भूलें ,साथ -साथ हर वोटर को ये शिक्क्षा देनी ना भूलें की वो केवल इमानदार प्रत्यासी को ही अपना अमूल्य वोट देंआप केवल ऐसा नेता ही चुने जो भविष्य में इमानदारी से आपका नेत्र्तव कर सके ,जो भ्रष्टाचारी ना हो ,विश्वश्घाती ना हो ,जिसे राजनितिक समझ भी हो ,जोबान का पाबन्द हो ,अपने क्षेत्र की जनता से बराबर संपर्क में रहता हो और आपकी परेशानी दुःख दर्द में काम आ सके ,अपने क्षेत्र में भरपूर काम कराये ,शिक्षा पर अधिक जोर देता हो ख़ुद भी पडा लिखा कम से कम इंटरमीडीऐट तो हो ,जो आपके क्षेत्र की समस्याओं को संसद में उठाने में तो सक्षम हो ताकि अधिक से अधिक विकास हो ,जातिवाद को बढावा ना देता हो ,सभी बिरादरियों को समानता से देखता हो और सभी के लिए काम करता हो जो पैसा बनाने में विश्वास ना करता हो और चुनाव में पैसा पानी की भांति ना बहाता हो क्योंकि अगर पैसा पानी की तरह बहायेगा तो वेसे ही पैसा बनाएगा भी ,और उस स्थिति में लोकतंत्र जिंदा नही रहेगा ,किसी को न्याय नहीं मिलेगा ,जो नेता आपको प्रलोभन दे उसको अपने क्षेत्र से भगाना ही ज्यादा अच्छा होगा ऐसे साफ़ सुद्ध छवि के सांसद या विधायक हो लोकतंत्र को जिंदा रखे हैं ------तो आप से मेरी एक बार फ़िर प्रार्थना है की साफ़ छवि के प्रत्यासी को ही जीत दिलाएं

Sunday, March 22, 2009

लोकतंत्र में जूता या चप्पल तंत्र क्योँ ?

सम्पूर्ण मानव समाज के लिए ये बहुत ही शर्मसार सा विषय है की पहले अमेरिका के राष्ट्रपति मिस्टरबुश पर जूते का फेंका जाना और अब हमारे देश में उच्चतम न्यायालय के जज पर चप्पल का फेंका जाना एक अजीब दुर्घटना है इस घटना के लिए सम्पूर्ण विश्व समुदाय हतप्रभ और दुखी है ,और सबसे बड़ी दुःख की बात हम हिन्दुस्तानियों के लिए है क्योंकि हमारे संस्कार इस प्रकार के व्यवहार की अनुमति नही देते और वो भी दुर्घटना के लिए जिम्मेदार एक शिक्षित और विदुषी महिला है ,अब प्रश्न उठता है की इस महिला ने आख़िर ऐसा क्योँ किया ये एक ऐसा विषय है उस पर हमारे आकाओं और राजनीतिज्ञों ,कानूनी विशेषज्ञों और शिक्षाविदों ,न्यायाधीशों को गंभीरता से सोचना चाहिए और ऐसे क़ानून या प्रयत्न करने चाहिए की भविष्य में ऐसी दुर्घटना ना हो ,जहाँ तक मेरी सोच है उसके मुताबिक हमारी न्याय प्रकिर्या में ही दोष है क्योंकि न्याय पाना आज की तारीख में मुश्किल हो गया है पहली बात तो है कि कोई भी अच्छा व्यक्ति कोर्ट कछेरी जाना नही चाहता परन्तु फ़िर भी घटिया किस्म के लोग उनको कानूनी प्रकिर्या में कहीं ना कहीं फंसाकर कोर्ट जाने को मजबूर कर देते है और कोर्ट के चक्कर पे चक्कर लगाता ,तारीखे भुगतता ,वकीलों कि ची चापद सुनता सुनता ,पैसे खर्च करता हुआ और ऊपर से जजों के द्बारा २ मिनट में बिना कुछ ढंगसे सुने फाइल आगे बड़ा देना और तारख पर तारीखे देना और न्याय पाने में बहुत देरी का हो जाना कभी कभी तो पूरी जिन्दगी ही गुजर जाती है और न्याय नही मिल पाताऔर वसीयत में बच्चों को भी मुकद्दमे ही देकर जाता है किसी भी शरीफ स्त्री या पुरूष को भिखारी बनाने के साथ साथ पागल भी कर देता है ऐसा जूते ,चप्पल फेंकने का कार्य वो इसी स्तर पर पहुचने के बाद करता है और उसके बाद कोर्ट या तो उसे जेल भेज देता है अथवा पागलखाने में भरती करा देता है पर उसकी पीडा ,कष्ट ,हालत को कोई भी नहीं सोचता अत; मेरी सभी से ये प्रार्थना है कि ये भी देखें कि इस सबके लिए दोषी कौन है ,और यदि न्याय प्रकिर्या दोषी है तो उसमे सुधार करना चाहिए ताकि भविष्य में ऐसी दुर्घटनाए जन्म ना ले , हमारे हिसाब से न्याय प्रकिर्या को त्वरित और अति शीघ्र बनाया जाए ताकि हर गरीब औरमजलूम आदमी मानसिक संतुलन खोने से पहले न्याय पा सके

Saturday, March 21, 2009

आख़िर सुप्रीम कोर्ट ने भी माना की आम आदमी को न्य्याय में देरी

लोकतान्त्रिक भारत में यदि आम आदमी को न्याय पाने का भरोसा है तो वो है केवल उच्च न्यायालय या उच्चतम न्यायालय पर ,इससे नीचे के न्यायालयों से तो भरोसा पूरी तरह उठ चुका है क्यों की वहाँ पर गरीब ,कमजोर ,शरीफ,अशिक्षित ,आदमी को तो न्याय मिल ही नही पाता ,जब की मालदार ,मजबूत ,भरष्ट ,बदमाश ,तिकडमबाजवहाँ पर सदेव अपने पक्ष में फेसला पाकर खुश रहता है ,हम नहीं जानते आख़िर ऐसा क्यों होता है ये हिसाब लगाना तो सरकार और छानबीन करने वालों का है हम तो जो देखते है वो ब्यान कर रहे है और देरी की हालत तो ये है की तारीख पर तारीख मिलती रहती हैं और उसमे गरीब और अशिक्षित को वकील आदि ना कुछ बताते है और ना कुछ करते है और केस को लंबा खीचते रहते है और गरीब एवं न्याय अपना दम तोड़ देते हैं ये तो रही नीचे की बात अब ऊपर का हाल भी ये है की अग्रिम जमानत जैसी याचिका जो की क्र्मिनल केस पर आधारित होती हैं उनकी रिट याचिका की १२या १५ तारीखे तक पड़ती रहती हैं और शरीफ आदमी को पुलिश की मिली भगत से क्रिमिनल बनाकर मालदार या बदमाश अथवा बेईमान आदमी मजे लेलेकर उसके गले में फांसी का फंदा अटकाकर मनचाहा कार्य करवा लेते हैं अथवा उसको जेल का डर दिख -दिखा कर हार्ट प्रॉब्लम तक करा देते हैं और एक दिन वो बेचारा असमय ही निर्दोष दम तोड़ देता है और उनके मन की मुराद पूरी हो जाती है इन सब में गरीब आदमी पिस्ता रहता है और पैसे वाला मजा लेता रहता ,इस बात को तो हमारे माननीय चीफ जस्टिस तक ने भी २१ -३-०९ के न्यूज़ पेपर टाइम्स ऑफ़ इंडिया में स्वीकार है और ये वास्तविकता भी है और उन्होंने ये ताकीद भी की है की इस प्रकार के क्रिमिनल केसेस को लंबा ना खींचा जाए ,यद्द्य्पी उन्होंने तो कह दिया पर उस पर अमल होगा या नहीं वो तो राम ही जाने ,परन्तु हम इतना जरूर कह सकते हैं की ना जाने कितने गरीब ,मजबूर ,मजलूम ,शरीफ आदमी बड़े और बदमाश लोगो की झूटी शिकायते ,झूठी क्रिमिनल रिपोर्टें करा कर पुलिश के साथ गठबंधन करके या उनको कैसे ही भी फंसाकर उनको या उनकी संपत्ति को घेरने काप्रयास अथवा घेर कर ,वकीलों को मोटी-मोटी रकम एक एक तारीख की देकर बड़े वकील करके उन लोगो को दुखी कर रहे है है जिनके पास वकील करने को पैसे ही नहीं हैं ये मालदार और बदमाश लोग किसी ना किसी तरह उन गरीब लोगो इतना मजबूर कर देते हैं की वो अपनी करोडो की प्रापर्टी लाखों में देकर या तो शहर छोड़ देते है अथवा जेल में पड़े सड़ते रहते है और उन का परिवार भी बरुआ बिरान हो जाता है अत; हमारी माननीय चीफ जस्टिस जी से करवद्ध प्रार्थना है की जो देरी कोर्ट्स में हो रही है कम से कम उससे तो आम आदमी को निजात दिलाये उनकी असीम क्रपा होगी

Wednesday, March 18, 2009

लतिका सरकार के समर्थन में देश के दिग्गज

दिल्ली में लता सरकार जैसी अकेली महिला ही नही है बल्कि हजारों की संख्या में ऐसी असहाय महिलाए है जो की आजकल अवांछित तत्वों से ही नहीं बल्कि अपने ही बच्चों ,रिश्तेदारों ने भी उनको उनकी प्रोपर्टी से बेदखल करके उनको व्रद्ध आश्रमों में यतीमों जैसी जिन्दगी जीने को मजबूर कर दिया है ,जब से देश में प्रोपर्टी के मूल्य अनाप सनाप बड़े है तभी से अपने बच्चे ,रिश्तेदार ,पड़ोसी ,किरायेदार ,नौकर तक गिद्ध द्रष्टि लगाकर बैठजाते है और किसी ना किसी प्रकार उसे हथियाने की कोशिश करते हैं ,और कुछ जगह तक मर्डर भी हो रहे हैं क्योंकि कानूनी प्रकिरिया बहुत लम्बी महँगी और दुरूह है और अवांछित तत्व इसी चीज का फायदा उठाते है ,परन्तु लतिका सरकार के केस में वास्तव में ऐसा प्रतीत हुआ है जिसमे केस को जल्दी हल करने के लिए डेल्ही हाई कोर्ट ने बहुत दिलचस्पी ली है और उसी का कारण और लतिका जी का जागरूक और समाज सेवी होने के कारण ही आज उनके पक्ष में देश के १५२ जाने माने ,प्रसिद्द लोग उनकी मदद करने के लिए आगे आए हैं ,ये बहुत ही उत्कृष्ट और साहसी कदम है इसके लिए इन्जाने माने व्यक्तियों की जितनी तारीफ़ की जाए उतनी ही कम है अब हम ये कह सकते है की इन हस्तियों के सहयोग से लतिका सरकार जी को जल्दी ही उनका आशियाना मिल जायेगा परन्तु इसमे यदि न्यायालय और जरा जल्दी फेसला कर दे तो सोने पे सुहागा होगा और इन १५२ आदमियों से भी मैं प्रार्थना करूंगा की यदि वो इसी प्रकार की कोई कमिटी बना ले और अपने साथ और भी वक्ती जोड़ कर कम से कम जो इस तरह की मजलूम स्त्रियाँ है उनको न्याय दिलवाने में मदद करेंगे तो शायद उनका भी कोई इतिहास तैयार हो जाए और न्याय को भी एक अच्छी सुप्पोर्ट मिल जायेगी और इस तरह फेसले जल्दी होने लगेंगेइन सबी ने मिलकर जो पात्र गृहमंत्रालय को भिजवाया है उसके लिए ये सभी धन्यवाद के पात्र है ,इन सभी की रूचि देश को आगे बढाने में सक्षम होगी \

Monday, March 16, 2009

नेता जी का भाषण

दूर से बहुत दूर से
चीखने की आवाज सुन
मैंने सोचा शायद
कोई सहायता हेतु
पुकार रहा है
फ़िर भी
संशय दूर करने हेतु
एह पथिक से पूछा
भाई ये क्या हो रहा है
तो तपाक से बोला
स्वार्थी ,निर्लज्ज
धूर्त , पाखंडी
अपनों को भी
धोखा देने वाला
नेता गला फाड़ -फाड़ कर
जनता को प्रलोभन दे
वोट मांग रहा है

लोकतंत्र के रक्षक हैं या ?

एक बहुरूपिया
धूर्त बेईमान
असभ्य ,क्रूर
सभ्य नागरिक की भाषा में
अपने दुर्गुणों का बखान
सदगुणों में प्रवर्त कर
त्यागियौं जैसा बोध
जनता जनार्दन पर
अभिमंत्रित कर रहा है ,
शासन करने हेतु
अपने लक्ष्य को
मीन की नैन बना
तन से श्याम
मन से कलुषित
इच्छाओं में सर्वोपरि
खाने के दांतों को
मुख में छिपा
दिखाने के दांतों से
हंस -हंस कर
श्वेत हाथी बना
दया की भीख मांग
जनता जनार्दन से
अधिकार छीनने के
प्रयत्न कर रहा है

Tuesday, March 10, 2009

लोकतंत्र की रक्षा हेतु मुझे भी उम्मीदवार बनाएं

मैं के .पी .चौहान लोकतंत्र की रक्षा हेतु भारत वर्ष की सभी राजनितिक पार्टियों से प्रार्थना करता हूँ किवो मुझे अपनी पार्टी से उम्मीदवार घोषित करें पार्टी का चयन मैं स्वयम सत्यता या मेरिट के आधार पर करूंगा यह अधिकार सर्वथा सुरक्क्षित है जिस पर ऊँगली उठाना बर्दास्त से बाहर होगा क्रप्या सोच समझकर उम्मीदवार घोषित करें क्योंकि मैं आपकी उस आकांक्षा को परिपूर्ण कर रहा हूँ कि आप कहते है योग्य उम्मीदवार भारत में नहीं मिलते ,यहाँ पर योग्य उम्मीदवारों कि कमी नहीं है यदि कमी है तो राजनितिक पार्टियों कीजो की हमारे जैसे सत्यवादी और इमानदार लोगों को वो टिकेट देते ही नही ,खेर छोडियेअब मैं आपको अपना जीवन परिचय देता हूँ
नाम ----के .पी .चौहान
पिता का नाम -स्वर्गीय आर .एस .चौहान
ग्राम --जलालपुर (बाराबस्ती ) बुलंदशहर ,उत्तर प्रदेश
लोकल पता ----बी ३२२ सरस्वती विहार प्रीतमपुरा दिल्ली ११००३४
राजनितिक प्रष्टभूमि --बाबा ,दादा सभी राजनीतिग्य,वर्तमान में भी सम्पूर्ण परिवार ,तीन भाई ,तीनो अलग -अलग पार्टीओं से सम्बंधित ,मैं स्वयम भारतीय जनता पार्टी से ,बीच वाला कांग्रेस पार्टी से ,सबसे छोटा समाजवादी पार्टी से बाकी सभी बच्चे निर्दलीय ,पर राजनीती सभी पर हावी ।
शिक्षा -----ग्रेजुएट
लेखक ----दिल्ली पुलिश के दर्द भरे आंसू ,,,मेर सोच ,,क्रूरता ,उद्योग निर्देशिका ,एवं कई साहित्यिक पुस्तके और लेख ,दहेज़ का देतय ,
कवितायें -----मेरे अपने ----मैं ----नारी ----कविता कुम्भन ---प्रक्रति ---मेरा देश ---नेतावली ---और कई पुस्तके ------
समाज सेवा में रत ----संस्थापक एवं महासचिव ---अखिल भारतीय राजपूत कल्याण सगठन ,
अध्यक्ष --------भ्रष्टाचार निकंदन समिति
उपाध्यक्ष ------अखिल भारतीय क्षत्रिय महासभा
सम्मानित सदस्य और सचिव ----भारतीय जनता पार्टी
अध्यक्ष -----राजपूत महासभा दिल्ली
प्रकाशक ----मधुमिता साहित्य प्रकाशन
प्रबंधके -----सम्पूर्ण चक्र पत्रिका
आजीवन सदस्य ---कितने ही ब्लाइंड स्कूल ,स्कूल ,कॉलेज ,डिग्री कॉलेज ,अस्पताल अनाथालय आदि ,
रूचि ,हॉबी ----पुस्तकें पढ़ना ,पुस्तकें लिखना कविताएं ,लेख गद्य ,पामिस्ट्री ,एस्ट्रोलोजी ,समाज सेवा करना ,गरीब और मजलूमों की सहायता करना ,राजनीति करना ,भ्रष्टाचारियों को सबक सिखाना ,सरकारी अफसरों को साफ़ शुद्ध छवि बनाने की प्रेरणा देना ,बुजुर्गों का ख्याल रखना ,देश सेवा को समर्पित ,अपांग और घायल पशु पक्षियों की सेवा करना ,भ्रूण ह्त्या को रोकने का प्रयास करना ,दहेज़ लोभियों को सबक सिखाना कन्याओं को पढाने की प्रेरणा देना ,बेरोजगारों को काम दिलवाना ,देश में तूफ़ान ,बवंडर आने पर ग्रसित व्यक्तियों की सेवा करना
गुन ----- इमानदारी की बिमारी ,बेईमानी से एलर्जी ,सत्य को गले लगाना ,झूठ को जिभ्या पर ना लाना ,अतिथि को भगवान् मानना ,दुष्टों के पास भी ना बेठना ,हराम की दौलत से नफरत करना ,संपर्क से अधिक कार्य को करना ,सादा जीवन उच्च विचार रखना ,गाँधी ,सुभाष दोनों को ही सम्मान देना ,सोनिया जी ,अडवानी जी ,मुलायम जी ,मायावती जी ,ललिता जी ,सबसे संपर्क साधना ,सदैव सकारात्मक सोच रखना ,अच्छे और इमानदार आदमियों कीइज्जत करना ,
व्यवहारिक गुन ----सबसे व्यवहार बनाकर रखना ,जानने या ना जानने वालों को भी नमस्कार करना ,जिससे कार्य करवाना हो उस पर कुत्ते की भांति भौकना ,जिससे काम ना लेना हो उसके पैरौं में चिपट जाना ,इमानदार नेताओं की सूची तैयार करना उनको दूरभाष आदि पर धन्यवाद करना ,इमानदार आफिसर्स को भी धन्यवाद करना ,ग़लत बातो का पूर्णत; विरोध करना

स्वप्न -------अपने देश में ही इमानदार पार्षद ,विधायक, सांसद , या इससे भी उच्च स्थान प्राप्त करना
प्रसिद्धि -----सम्पूर्ण भारत में ,मुख्यतया दिल्ली में सम्पूर्ण राजपूत बिरादरी पर पूरी पकड़ ,लगभग सभी बड़े -बड़े नेता और ,धार्मिक व्यक्ति और राजपूत बयूरोक्रेत एवं संस्थानों और संस्थाओं के करता धरता ,सभी से पूर्णत; संपर्क ,सभी बिराद्रिओंसे पूरी तरह से मेल मिलाप और उनके बुरे और अच्छे समय में काम आना ,दिल्ली का तो कोई भी ऐसा कोना ना होगा जहाँ पर लोग मुझे ना जानते हों ,दिल्ली का कोई डिपार्टमेंट (महकमा )नही होगा जो के .पी .चौहान और बी ३२२ सरस्वती विहार को ना जानता हो यानी के दिल्ली के तो किसी क्षेत्र से टिकेट दे दो जीत सम्भव है ,मैं पूरी तरह जमीनी व्यक्ति हूँ ,पूरी तरह से राजनीतिग्य मिलनसार ,म्रदुभाशी ,व्यवहारिक ,वात्स्ल्य्याई ,कर्मठ ,सहिष्णु .उदार ,कर्तव्य का पालन करने वाला ,इमानदार ,
पेशा ---व्यवसायी (प्लास्टिक ,और प्रेसियास स्टोन ,)







होली की शुभकामनाएं

के .पी .चौहान के द्बारा सभी ब्लोगेर्स को होली की बहुत -बहुत सुभकामनाएँ ,होली मैया करे की हम और आप सभी ब्लोगेर्स को दिन दूनी रात चौगुनी तरक्की देकर समर्ध्शाली बनाएं

Monday, March 9, 2009

लोकतंत्र में चीफ जस्टिस के सम्मुख आग लगाकर आत्महत्या क्योँ ?

भारत जैसे लोकतांत्रिक देश में सभ्य समाज का सभ्य पुरूष आख़िर क्यों चीफ जस्टिस के सम्मुख स्वयम पर आग लगाकर आख़िर आत्महत्या क्यों करना चाहता है ,जहाँ -जहाँ पर भी उसने गुहार लगाई होगी शायद ही किसी ने ने उसकी पीडा को जाना हो या जानने की कोशिश की हो ऐसा प्रतीत नही होता हर किसी ने उसे मानसिक रूप से विक्षिप्त कहकर टाल दिया होगा ,और अदालत ने भी आवेदन की सुनवाई के बाद लीगल सर्विस अथोरिटी से उसकी मानसिक हालत को देखकर काउंसलिंग की सलाह दी ,और अतिरिक्त जिला चीफ जज ने भी उसकी मानसिक हालत ख़राब बतायी ,और ये वास्तविकता भी हो सकती है पर ज़रा सोचिये किसी शरीफ आदमी को उसके एकमात्र मकान पर ऍम सी डी और बिल्डर आदि मिलकर अवेद्य निर्माण कहकर ,३० या ३५ कोर्ट केसेस उसपर डलवा देंऔर पैस्सा उसकी जेब में मुक़द्द्मा लड़ने के लिए हो नही ,कोर्ट में वकीलों को तो पैसा देना ही पडेगा और कोर्ट के भी चक्कर लगा -लगाकर चप्पले टूट गई हों कपड़े बसों में धक्के खाते -खाते फट गए हों तो ज़रा सोचिये अच्छे से अच्छे व्यक्तिका मानसिक संतुलन भी ख़राब हो जायेगा इस बेचारे मजलूम की तो बात क्या है ,हमारे देश की कानूनी प्रकिर्या इतनी दुरूह है की यदि कोर्ट में कोई आदमी एक केश किसी पर डाल दे तो धीरे -धीरे उसी के ६ केस बन जाते है और आजकल जब से प्रोपर्टी के रेट अनाप सनाप बड़े है तब से कारपोरेशन और ड़ी डी,ऐ,या यों कहिये की जो उससे सम्बंधित कार्यालय है सभी ने अपने सुविधा शुल्क में असीमित बढोतरी कर राखी है ,जैसे सरकार शिकंजा कसती है इनका रिस्क बढ जाता है और ये अपना रेट बढा देते है और ये डिपार्टमेंट या बिल्डर अथवा भूमाफिया प्रत्येक कोर्ट की तारीख पर नई -नई दरख्वास्त लगाते रहते है कारण केसेस कभी ख़त्म ही नही होते और फ़िर एक दिन प्रापर्टी मालिक या तो उस जगह को ही छोड़ देता है या जैसे वो कहतेहै करता है ,इस प्रकार से शरीफ आदमी की मल्कियत छीन जाती है और लोकतंत्र ,मालिक ,और कोर्ट खडा -खडा सब कुछ देखता रह जाता है अब बताओ उसे न्याय कहाँ मिला ,और जो हम आज देख रहे है उसके मुताबिक तो एक परमजीत ही नही बल्कि दिल्ली में हजारो परमजीत है जो किसी तरह से अपनी मल्कियत बचाने की कोशिश तो कर रहे है पर बचेगी नही उसे लुटेरे लूट ही लेंगे आज नही तो कल ,क्योंकि कानूनी प्रिकिर्या बहुत लम्बी है ,आदमी मर जाता है पर फेसले नही होते उसकी आने वाली पीदियाँ भी लड़ती रहती है पर नतीजा कुछ भी नही नही ,और फ़िर सरकारी संस्थाए उनमे भी एम् ,सी ,दी यादिल्ली विकास प्राधिकरण जिनके बारे में सभी जानते है की ये कितनी इमानदारी से कार्य करती है इनको आए दिन कोर्ट में फटकार पड़ती रहती है पर इनके कान पर जू नही रेंगती ,इनका तो काम ही जनता को परेशान करना है ,तो मेरे भाई परमजीत जी मैं तो आपको यही सलाह दूंगा की किसी तरह से इनसे समझोता कर करा कर दूरकरो वरना ये आपको कुछ भी बना देंगे इस लिए भाई bachi हुई jindgi को खुशी से jee लो और आत्महत्या आदि का sochnaa छोड़ दो ,कहाँ -कहाँ टक्कर मारते firoge यहाँ तो andher nagri chopat raajaa है

Sunday, March 1, 2009

लोकतंत्र में चुनावों से पहले कि स्थिति

लोकतंत्र में आज चुनावों से पहले की दलगत स्थिति देखकर तो लगता है की सभी बड़े बड़े दल छोटे दलों को नए नए प्रलोभन दिखाकर अपने समर्थन में लाने की कोशिश कर रहे हैं ताकि चुनाव के बाद सरकार बनाने में उन्हें परेशानी का सामना ना करना पड़े और वो भी अभी बड़े दलों को भाव नही दे रहे है क्योंकि वो भी तो चुनाव के बाद की स्थिति देखकर ही अपना मुख खोलेंगे की क्या क्या चाहिए कौन सा मंत्री पद चाहिए ,क्या जनता अपने अपने इलाको से इन लोगों को इसी लिए चुनकर भेजती है किचुने जाने के बाद ये लोग खरीद फरोक्त में शामिल हो जाए और क्षेत्र कि जनता के बारे में ना सोचकर केवल अपने या अपने परिवार के ही बारे में सोचे और ज्यादा करेंगे तो इलाके में नहीं जायेंगे ,हर बार जनता से ऐसे ही उनका कीमती वोट लूटकर ले जाते रहेंगे और जनता हाथ मालती रहेगी पिछले ६० वर्षों से यही तो जनता के साथ हो रहा है पर जनता है कि इन होर्से ट्रेडिंग में शामिल होने वालो हर बार नाम बदलकर आने पर ही घोडो पर बिठा देती है जब तक देश में ये होता रहेगा तब तक देश का दुर्भाग्य ही है अत; हमारी जनता से अपील है कि वो उन्ही लोगों को चुनाव में जिताए जिनसे ये पक्की उम्मीद हो कि वो खरीद बेच में शामिल ना होकर अपने क्षेत्र कि जनता कि भलाई के लिए कार्य करेंगे ,,यदि जनता ऐसा नही करेगी तो भारत में लोकतंत्र कि स्थिति बद से बदतर हो जायेगी ,,,